धन्य धन्य हम रहे….
Posted on October 18, 2007 by Raji Chandrasekhar
सत्यवीर सिंह जी ज्ञान(म) जी अजॆय जी
नित्य सूर्य कॆ समान मार्ग तॊ दिखा रहॆ।
आप की ज़ुबान से बह रही सुवाणी की
माप तो न कर सके, धन्य धन्य हम रहे।
राज्य-राज्य भिन्न हो ध्यॆय एक ही रहॆ
आज हिंदी का सही रूप सीख लेंगे हम।
15-10-2007
(कॆंद्रीय हिंदी संस्थान, मैसूर केंद्र के द्वारा आयोजित शिक्षक नवीकरण कार्यक्रम के संदर्भ में…)
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